गोस्वामी तुलसीदास जी श्रीरामचरितमानस की रचना करते हुए, साथ में भगवान गणेश, भगवान विष्णु और भगवान शिव के दिव्य स्वरूप

श्रीरामचरितमानस के 4 सोरठे

  Shri Ramcharitmanas ke 4 Sorathe श्रीगणेश, विष्णु और शिव वंदना एवं भगवत्कृपा की महिमा जय श्रीराम🙏 श्रीरामचरितमानस — सोरठा 1 से 4 तक की विस्तृत भक्तिपूर्ण व्याख्या गणेश वंदना, भगवत्कृपा की महिमा, भगवान विष्णु और भगवान शिव की वंदना 🌺 भक्तिपूर्ण मंगल आरंभ जय श्री सीताराम! जय श्री गणेश! हर हर महादेव! 🙏 Shri

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गोस्वामी तुलसीदास जी श्रीरामचरितमानस की रचना करते हुए, पीछे दिव्य स्वरूप में भगवान श्रीराम, माता सीता, लक्ष्मण जी और भक्त हनुमान जी

तुलसीदास जी का विनम्र संकल्प

तुलसीदास जी का विनम्र संकल्प श्रीराम कथा जय श्रीराम🙏 जब मनुष्य के हृदय में भगवान श्रीराम के प्रति सच्ची श्रद्धा जागृत होती है, तब उसके भीतर भक्ति की ऐसी पवित्र धारा प्रवाहित होने लगती है, जो उसे संसार के मोह-माया से ऊपर उठाकर प्रभु के चरणों तक पहुँचा देती है। श्रीराम की कथा केवल सुनने

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श्री राम के दिव्य ब्रह्म स्वरूप का भव्य चित्र, जिसमें भगवान श्रीराम ब्रह्मांड के केंद्र में दिव्य प्रकाश के साथ विराजमान हैं। उनके चारों ओर सृष्टि, आकाशगंगाएँ, देवी-देवता, पृथ्वी और भवसागर से पार उतरने का प्रतीक दिखाई देता है। यह चित्र रामचरितमानस की छठी वंदना में वर्णित भगवान श्रीराम के परम कारण, माया के स्वामी और संसार-सागर से तारने वाले स्वरूप को दर्शाता है।

भगवान राम के परब्रह्म स्वरूप का रहस्य

भगवान राम के परब्रह्म स्वरूप का रहस्य श्रीराम कथा जय श्रीराम🙏 श्रीरामचरितमानस की छठी वंदना में गोस्वामी तुलसीदास जी भगवान राम के उस दिव्य स्वरूप का वर्णन करते हैं, जो संपूर्ण सृष्टि का आधार है। इस श्लोक में वे श्रीराम को केवल अयोध्या के राजकुमार , मर्यादा पुरुषोत्तम या भगवान विष्णु के अवतार के रूप

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Mata Sita ko karunamayi Jagat Janani ke roop me darshati divya chitrakala, jisme ve ek dukhi balak ko santvana deti hui maa ke roop me aur aakash me bhakton par ashirwad barsate hue dikh rahi hain, neeche sant aur Dharmadas nadi ghat par ye matritva bhaav dekh rahe hain

माता सीता के दिव्य रूप और शक्तियाँ

माता सीता के दिव्य रूप और शक्तियाँ श्री सीताराम कथा 🙏जय श्री सीताराम🙏 माता सीता के दिव्य रूप और शक्तियाँ केवल एक धार्मिक विषय नहीं, बल्कि सनातन संस्कृति में नारी की पवित्रता, त्याग, करुणा, धैर्य और असीम शक्ति का प्रतीक हैं। माता सीता के दिव्य रूप और शक्तियाँ हमें यह संदेश देती हैं कि सच्ची

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माता पार्वती और भगवान शिव के दिव्य स्वरूप के साथ गोस्वामी तुलसीदास जी द्वारा रामचरितमानस की रचना का भक्तिमय दृश्य। चित्र पर हिंदी में “श्रद्धा और विश्वास की वंदना” लिखा है, जो रामचरितमानस के मंगलाचरण की द्वितीय वंदना और श्रद्धा-विश्वास के आध्यात्मिक महत्व को दर्शाता है।

श्रद्धा और विश्वास की वंदना

श्रद्धा और विश्वास की वंदना | माता पार्वती और भगवान शिव की महिमा श्रीराम कथा जय श्री सीताराम🙏 द्वितीय वंदना — श्रद्धा और विश्वास की वंदना मूल चौपाई/श्लोक भवानीशंकरौ वन्दे श्रद्धाविश्वासरूपिणौ। याभ्यां विना न पश्यन्ति सिद्धाः स्वान्तःस्थमीश्वरम्॥२॥ भावार्थ मैं श्रद्धा और विश्वास के स्वरूप माता पार्वती जी और भगवान शंकर जी की वंदना करता हूँ।

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महर्षि वाल्मीकि रामायण लिखते हुए, बीच में माता सीता और भगवान श्रीराम के दिव्य दर्शन तथा दाईं ओर भक्त हनुमान जी हाथ जोड़कर बैठे हुए। भक्तिमय चित्र पर लिखा है—“लिखा राम जिया राम”।

लिखा राम जिया राम

लिखा राम जिया राम श्रीराम कथा जय श्री हरी🙏 एक ने श्रीराम की कथा को शब्दों में अमर कर दिया, तो दूसरे ने श्रीराम के आदर्शों को अपने जीवन में उतार दिया। एक ने अपनी लेखनी से संसार को श्रीराम के चरित्र से परिचित कराया, तो दूसरे ने अपनी भक्ति, सेवा और समर्पण से श्रीराम

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गुरु की महिमा और चंद्रमा का रहस्य दर्शाता भक्तिमय चित्र, जिसमें गुरु शिष्य को शिक्षा देते हैं और भगवान शिव के मस्तक पर अर्धचंद्र सुशोभित है।

गुरु की महिमा और चंद्रमा

गुरु की महिमा और चंद्रमा — ज्ञान, आश्रय और सम्मान की प्रेरक कथा जय सियाराम🙏 गुरु की महिमा और चंद्रमा का रहस्य हमें यह समझाता है कि जीवन में सही मार्गदर्शन का कितना महत्व है। जिस प्रकार भगवान शिव के मस्तक पर विराजमान चंद्रमा श्रद्धा और सम्मान का प्रतीक बन जाता है, उसी प्रकार एक

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गोस्वामी तुलसीदास जी रामचरितमानस लिखते हुए, साथ में माँ सरस्वती और भगवान गणेश जी का दिव्य चित्र

माँ सरस्वती और गणेश जी की मंगलाचरण

माँ सरस्वती और गणेश जी की मंगलाचरण  Story of Ramcharitmanas  जय श्री सीताराम!🙏 एक शांत वातावरण है। चारों ओर प्रभु श्रीराम के नाम की पवित्रता फैली हुई है। एक संत अपने सामने कागज, कलम और अपने आराध्य का स्मरण लेकर बैठे हैं। उनका नाम है, गोस्वामी तुलसीदास जी। उनके हृदय में प्रभु श्रीराम के प्रति

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भगवान श्रीराम के समक्ष विनम्र भाव से बैठे लक्ष्मणजी, आत्मज्ञान की खोज और जीवन के परम सत्य पर आधारित श्रीरामगीता का दिव्य संवाद।

आत्मज्ञान की खोज में लक्ष्मणजी की जिज्ञासा

आत्मज्ञान की खोज में लक्ष्मणजी की जिज्ञासा श्रीराम गीता जय सियाराम🙏 आज का मनुष्य चारों ओर से भागदौड़, तनाव, प्रतिस्पर्धा और अनगिनत इच्छाओं के जाल में उलझा हुआ है। तकनीक ने जीवन को सुविधाजनक तो बना दिया है, किन्तु मन की शांति और आत्मिक संतोष कहीं पीछे छूटते जा रहे हैं। ऐसे में प्रत्येक संवेदनशील

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सही प्रश्नों की शक्ति - अयोध्या का दृश्य, श्रीराम महल में सिंहासन पर बैठे हैं। उनकी चरणों के पास हाथ जोड़े लक्ष्मणजी बैठे हैं

सही प्रश्नों की शक्ति

  सही प्रश्नों की शक्ति प्रभु श्रीराम की महिमा जय सियाराम🙏 जीवन केवल सुविधा और सफलता तक सीमित नहीं है। मनुष्य को कभी-कभी स्वयं से भी प्रश्न करना चाहिए— मैं जो कर रहा हूँ, क्या वह सही है? मेरे निर्णयों का दूसरों पर क्या प्रभाव पड़ेगा? क्या मैं केवल लाभ के लिए जी रहा हूँ

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