गुरु व संत वंदना की भावपूर्ण व्याख्या: एक संत या गुरु आसन पर विराजमान हैं और उनके सामने भक्त हाथ जोड़कर श्रद्धा से गुरु व संत वंदना कर रहे हैं, पृष्ठभूमि में दिव्य आध्यात्मिक आभा दिखाई दे रही है।

गुरु व संत वंदना की भावपूर्ण व्याख्या

      🌸 श्रीरामचरितमानस – बालकाण्ड (प्रथम सोपान) 🌸 गुरु व संत वंदना की भावपूर्ण व्याख्या हर भक्तिग्रंथ की तरह श्रीरामचरितमानस की रचना भी मंगलाचरण से होती है। परन्तु तुलसीदासजी केवल किसी एक देवता का नाम लेकर नहीं रुकते — वे क्रमशः सज्जन, और तीर्थराज प्रयाग की स्तुति के साथ साथ गुरु व संत […]

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श्रीराम के लिए दिव्य आसन, पूजन, विनियोग मंत्र, आचमन एवं प्राणायाम मंत्र के साथ उनकी पूजा कर रहा है।

श्रीराम के लिए दिव्य आसन, पूजन, विनियोग मंत्र, आचमन एवं प्राणायाम

श्रीराम के लिए दिव्य आसन, पूजन, विनियोग मंत्र, आचमन एवं प्राणायाम 🪔 भाग 3: आवाहन समापन एवं पूजन आरंभ (श्लोक 11–करन्यास)  श्लोक 11: श्रीराम के लिए दिव्य आसन अर्पण इत्यावाहनम्सुवर्णरचितं राम दिव्यास्तरणशोभितम्।आसनं हि मया दत्तं गृहाण मणिचित्रितम् ॥११॥ हिंदी अर्थ: हे श्रीराम! मैंने जो स्वर्ण निर्मित, दिव्य वस्त्रों और मणियों से अलंकृत यह सुंदर आसन

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वंदना पदावली - बालकाण्ड प्रारंभ: भगवान श्रीराम सिंहासन पर विराजमान, उनके साथ भगवान गणेश, देवी सरस्वती, भगवान शिव और गुरु का दिव्य स्वरूप – श्रीरामचरितमानस पारायण की प्रारंभिक पंचवंदना का पवित्र दृश्य

वंदना पदावली – बालकाण्ड प्रारंभ

वंदना पदावली – बालकाण्ड प्रारंभ श्रीरामचरितमानस बालकाण्ड के इन पंचवंदना पदों में तुलसीदासजी ने श्रीगणेश, सरस्वती, गुरु, शिव और श्रीराम — इन पाँच दिव्य रूपों की वंदना की है। यह वंदनाएँ केवल औपचारिक नहीं, बल्कि आत्मा के गहन भावों और काव्यशक्ति की प्रेरणा से ओतप्रोत हैं। 🌺 1. गणेश वंदना जो सुमिरत सिधि होइ गन

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श्रीरामचरितमानस पारायण – प्रारंभिक आवाहन मंत्र: सिंहासन पर विराजमान भगवान श्रीराम हाथ में धनुष धारण किए हुए, सामने भक्तिभाव से बैठे हनुमानजी और माता सीता, रामचरितमानस पारायण के प्रारंभिक आवाहन मंत्र का दिव्य दृश्य

श्रीरामचरितमानस पारायण – प्रारंभिक आवाहन मंत्र

      🌺 श्रीरामचरितमानस पारायण मंत्र (श्लोक 1–10) 🌺 आवाहन से लेकर श्रीराम के ध्यान व आवाहन तक | शुद्ध पाठ | हिंदी अर्थ | विस्तृत भावार्थ श्रीरामचरितमानस पारायण का आरंभ 7 विशेष मंत्रों से होता है जिन्हें आवाहन मंत्र कहा जाता है — जिनमें रामकथा से जुड़े सभी प्रमुख पात्रों (तुलसीदास, वाल्मीकि, शिव,

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