नारी शक्ति आद्य शक्ति प्रकृति: आदिशक्ति देवी सिंह पर विराजमान हैं, दोनों ओर माता सीता, द्रौपदी, लक्ष्मी और सरस्वती दिव्य स्वरूप में दर्शाई गई हैं।

नारी शक्ति आद्य शक्ति प्रकृति

नारी शक्ति आद्य शक्ति प्रकृति पौराणिक कथाएं जय श्री हरी🙏 समय की गहराइयों से एक स्वर उठता है। एक ऐसा स्वर, जो कभी इतिहास बना, कभी वेदों में गूंजा, और कभी सभ्यताओं के उत्थान और पतन का कारण बना। यह स्वर है नारी शक्ति आद्य शक्ति प्रकृति की अतीत की आवाज। अतीत कहता है —”मैं […]

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पितृ पक्ष में पितृ दोष निवारण के लिए मंत्र जाप और तर्पण करते श्रद्धालु, पृष्ठभूमि में दिव्य प्रकाश और पितृ लोक का आध्यात्मिक प्रतीक

पितृ पक्ष : पितृ दोष निवारण मंत्र और उपाय

      🕉️ पितृ पक्ष : पितृ दोष निवारण मंत्र और उपाय पितृ पक्ष की शुरुआत हो चुकी है, और इस दौरान हर हिंदू परिवार अपने पूर्वजों की आत्मा की शांति, उनके आशीर्वाद और पितृ दोष से मुक्ति के लिए श्राद्ध, तर्पण, पिंडदान और मंत्र जाप जैसे उपाय करता है। 📜 इस लेख में

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पितृ पक्ष : महत्त्व, अनुष्ठान और पवित्र स्थलों की पूरी जानकारी-पितृ पक्ष के दौरान नदी तट पर श्राद्ध और तर्पण करते दंपत्ति, पीछे गया, त्रिवेणी संगम और रामेश्वरम जैसे पवित्र तीर्थस्थलों का आध्यात्मिक दृश्य, पितृ आत्माओं की उपस्थिति के साथ।

पितृ पक्ष : महत्त्व, अनुष्ठान और पवित्र स्थलों की पूरी जानकारी

<!doctype html> तर्पण और श्राद्ध की विधियाँ तथा गया, त्रिवेणी, फल्गु नदी, गोकर्ण, सीताकुंड और रामेश्वरम जैसे पवित्र स्थलों का विशेष महत्व।” /> पितृ पक्ष : महत्त्व, अनुष्ठान और पवित्र स्थलों की पूरी जानकारी पितृ पक्ष — अपने पूर्वजों की स्मृति, श्राद्ध-तर्पण और आत्मिक शांति का पवित्र काल। नीचे इस पर्व का इतिहास, विधि और

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हरि हृदय में तब बसते हैं जब भक्ति से गाएं भक्तों के गुण-भक्तमाल की पावन कथा भाग 1 में भगवान विष्णु एक भक्त को गोद में लिए हुए, साथ में संत मीरा, कबीर और अन्य भक्तों की दिव्य छवि

हरि हृदय में तब बसते हैं जब भक्ति से गाएं भक्तों के गुण

      भक्तमाल की पावन कथा – भाग 1 हरि हृदय में तब बसते हैं जब भक्ति से गाएं भक्तों के गुण 🎙️ “जब संसार की अशांति, जीवन की थकान, और आत्मा की पीड़ा बढ़ जाए,तब संतों के चरित्र, भक्तों के गुण,एक मधुर संजीवनी बनकर हमारे अंतर्मन को शुद्ध करते हैं…आज हम चलेंगे एक

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भगवान विष्णु के साथ उनके पार्षदगण और हरिवल्लभ भक्तों की दिव्य सभा, स्वर्णिम आभा में भक्तों की माला और भक्ति का अद्भुत दृश्य

भगवान के पार्षदगण और हरिवल्लभ भक्तों की माला

      🙏 भक्तमाल: भक्तों की अमरगाथा “जब जब धर्म की पताका लहराई, तब तब भक्तों ने अपने जीवन को समर्पित कर दिया प्रभु के चरणों में।” “आज हम उस अनुपम ग्रंथ की ओर चलें, जिसने भक्तों की परंपरा को न केवल संजोया, अपितु जनमानस को प्रभुभक्ति की पराकाष्ठा से परिचित भी कराया –

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भक्तमाल कथा में भगवान विष्णु एक भक्त बालिका को गोद में लिए हुए, साथ में संतों और भक्तों की दिव्य सभा तथा स्वर्णिम भक्ति आभा

भक्तमाल कथा – मंगलाचरण और भक्तगुण वर्णन

      भक्तमाल कथा जय श्री हरि…आज हम सुनेंगे उस ग्रंथ की कथा… जो केवल भक्तों का चरित्र नहीं, अपितु हृदय में भगवद्भक्ति की ज्वाला प्रज्वलित करनेवाली अमृतधारा है।यह है — भक्तमाल… श्रीनाभादास जी द्वारा रचित वह अनुपम भक्तिसंग्रह, जिसमें भक्तों की वाणी, तप, त्याग और प्रेम की झलक मिलती है।आइए, आरम्भ करें… इस

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स्वर्णिम मंदिर में सिंहासन पर विराजमान भगवान विष्णु भक्तों को आशीर्वाद देते हुए, पुरुष और महिला भक्त हाथ जोड़कर प्रार्थना करते हुए – भगवान को प्रिय बनने और भगवत्प्राप्ति की सहज राह

भगवान को प्रिय बनने और भगवत्प्राप्ति की सहज राह

भगवान को प्रिय बनने और भगवत्प्राप्ति की सहज राह श्रीनाभादासजी महाराज, भक्तमाल में भगवद्भक्तों की महिमा का गायन न केवल भक्ति का आधार मानते हैं, बल्कि उसे परम कल्याणकारी साधन के रूप में प्रस्तुत करते हैं। वे भगवान को प्रिय बनने और भगवत्प्राप्ति की सहज राह में यह उद्घोष करते हैं कि— हरिजन को गुन

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भक्तमाल: प्राकट्य कथा

भक्तमाल: प्राकट्य कथा

      भक्तमाल: प्राकट्य कथा भक्ति-साहित्य का अनमोल रत्न ‘भक्तमाल ’ केवल एक ग्रंथ नहीं, बल्कि भक्तों की भावनाओं की जीवंत अभिव्यक्ति है। यह केवल संतों की महिमा गान नहीं करता, अपितु यह ईश्वर और भक्त के मधुरतम संबंधों की अमर गाथा है। इस ग्रंथ की विशेषता यह है कि यह जितना भक्तों को

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