हैहय वंश और सहस्त्रार्जुन की उत्पत्ति
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पद्ममहापुराण — सृष्टिखण्ड, अध्याय 12 चंद्र वंश की उत्पत्ति: सहस्त्रार्जुन बनाम रावण और परशुराम जय श्री हरी🙏 हैहय वंश में जन्मे उस महान धर्मात्मा राजा जिसने रावण को हराया, और अंत में परशुराम के हाथों वीरगति को प्राप्त हुआ। पुराणों में उल्लेख है कि उन महान धर्मात्मा राजा के नाम जपने से धन संपत्ति और
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पद्ममहापुराण — सृष्टिखण्ड, अध्याय 12 चंद्र वंश की उत्पत्ति: पुरूरवा और उर्वशी की अमर प्रेमकथा जय श्री हरी🙏 पुराणों में वर्णित कुछ कथाएँ केवल इतिहास नहीं होतीं, वे मानव जीवन के गहरे भावों, प्रेम, विरह, मर्यादा और कर्म का दर्पण होती हैं। बुध के जन्म और ग्रह के रूप में स्थापित होने के बाद बुध
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पद्ममहापुराण — सृष्टिखण्ड, अध्याय 12 चंद्र वंश की उत्पत्ति: बुध का जन्म और ग्रहत्व जय श्री हरी🙏 पौराणिक कथाओं में कुछ प्रसंग छोटे होते हुए भी अत्यंत गूढ़ और दर्शनपूर्ण होते हैं। चन्द्रमा–तारा विवाद के पश्चात उत्पन्न यह कथा उसी श्रेणी की है। ब्रह्माजी के द्वारा समझाने पर चन्द्रमा ने युद्ध रोक दिया और देवगुरु
पद्ममहापुराण — सृष्टिखण्ड, अध्याय 12 चंद्र वंश की उत्पत्ति: चन्द्रमा–तारा विवाद : 5 अद्भुत और चौंकाने वाले रहस्य जिन्होंने हिला दी सृष्टि जय श्री हरी🙏 चन्द्रमा–तारा विवाद – जिसके कारन देवासुर संग्राम हुआ। अवैध प्रेम से उत्पन्न ब्रह्माण्ड की प्रलयकारी अद्भुत घटना। इस घटना ने एक ग्रह को जन्म दिया जिसे बुध ग्रह कहा गया
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पद्ममहापुराण — सृष्टिखण्ड, अध्याय 12 चन्द्रमा की उत्पत्ति और महिमा जय श्री हरी🙏 यह घटना महाभारत के पहले की है क्योंकि महाभारत की पृष्ठभूमि हजारों वर्ष पहले तय हो चूका था। कुरु वंश के पहले पुरु वंश और पुरु वंश के पहले चंद्र वंश। तो पहले हम चंद्र वंश से शुरू करते हैं। सनातन धर्म
सोम (चन्द्रमा) की उत्पत्ति और महिमा Read More »
तुलसी त्रिरात्र व्रत: अद्भुत लाभ और चमत्कारी महत्व पद्मपुराण उत्तरखंड अध्याय 26: जय श्री हरी🙏 सनातन धर्म में तुलसी को केवल एक पवित्र वनस्पति ही नहीं, बल्कि स्वयं श्रीहरि की प्रिय और साक्षात् देवीस्वरूपा माना गया है। “तुलसी त्रिरात्र व्रत” का शाब्दिक अर्थ है “तुलसी देवी को समर्पित तीन रातों तक किया जाने वाला पवित्र
तुलसी त्रिरात्र व्रत – कार्तिक शुक्ल नवमी से एकादशी तक Read More »
पद्ममहापुराण — उत्तरखण्ड अध्याय 24: प्रयाग महिमा: त्रिवेणी संगम का दिव्य रहस्य | 12 दिव्य और रहस्मयी बातें जय श्री हरी🙏 श्रीपद्ममहापुराण – उत्तर खण्ड, उमापति-नारद संवाद सनातन धर्म में तीर्थों का अत्यंत विशेष स्थान बताया गया है। तीर्थ केवल जल, भूमि या पर्वत का संगम नहीं होते, बल्कि वे ईश्वर की सजीव उपस्थिति के
प्रयाग महिमा: त्रिवेणी संगम का दिव्य रहस्य | क्यों है प्रयाग सभी तीर्थों में श्रेष्ठ Read More »