बुध अवतरण की पौराणिक कथा का चित्र, जिसमें तारा से जन्मे बुद्धि के देवता बुध सिंहासन पर विराजमान हैं, ऊपर ब्रह्मा जी आशीर्वाद दे रहे हैं, एक ओर चन्द्रमा और दूसरी ओर बृहस्पति दिखाई देते हैं, तथा आकाश में सूर्य-चन्द्र और ग्रहों का दिव्य दृश्य उपस्थित है।

बुध का जन्म

पद्ममहापुराण — सृष्टिखण्ड, अध्याय 12 चंद्र वंश की उत्पत्ति: बुध का जन्म और ग्रहत्व जय श्री हरी🙏 पौराणिक कथाओं में कुछ प्रसंग छोटे होते हुए भी अत्यंत गूढ़ और दर्शनपूर्ण होते हैं। चन्द्रमा–तारा विवाद के पश्चात उत्पन्न यह कथा उसी श्रेणी की है। ब्रह्माजी के द्वारा समझाने पर चन्द्रमा ने युद्ध रोक दिया और देवगुरु […]

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चंद्र वंश की पौराणिक चन्द्रमा–तारा विवाद कथा का दृश्य जिसमें भगवान शंकर और चन्द्रमा के बीच भीषण महायुद्ध दिखाया गया है, ऊपर ब्रह्मा जी युद्ध रोकते हुए दिखाई देते हैं, आकाश में सूर्य और चन्द्र के प्रतीक हैं तथा देवताओं और असुरों की सेनाएँ त्रिलोकी को कंपित करती हुई दर्शाई गई हैं।

 चन्द्रमा–तारा विवाद

पद्ममहापुराण — सृष्टिखण्ड, अध्याय 12 चंद्र वंश की उत्पत्ति: चन्द्रमा–तारा विवाद : 5 अद्भुत और चौंकाने वाले रहस्य जिन्होंने हिला दी सृष्टि जय श्री हरी🙏 चन्द्रमा–तारा विवाद – जिसके कारन देवासुर संग्राम हुआ। अवैध प्रेम से उत्पन्न ब्रह्माण्ड की प्रलयकारी अद्भुत घटना। इस घटना ने एक ग्रह को जन्म दिया जिसे बुध ग्रह कहा गया

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सोम (चन्द्रमा) की उत्पत्ति और महिमा- अत्रि मुनि के तप से चन्द्रदेव (सोम) की उत्पत्ति, ब्रह्मा द्वारा अभिषेक और देवताओं के साथ राजसूय यज्ञ का दिव्य दृश्य।

सोम (चन्द्रमा) की उत्पत्ति और महिमा

पद्ममहापुराण — सृष्टिखण्ड, अध्याय 12 चन्द्रमा की उत्पत्ति और महिमा जय श्री हरी🙏 यह घटना महाभारत के पहले की है क्योंकि महाभारत की पृष्ठभूमि हजारों वर्ष पहले तय हो चूका था। कुरु वंश के पहले पुरु वंश और पुरु वंश के पहले चंद्र वंश। तो पहले हम चंद्र वंश से शुरू करते हैं। सनातन धर्म

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कार्तिक मास में तुलसी त्रिरात्र व्रत करते हुए ब्राह्मण द्वारा वैष्णव होम, तुलसी पौधा, कलश, दीप और लक्ष्मी–नारायण भगवान की दिव्य छवि

तुलसी त्रिरात्र व्रत – कार्तिक शुक्ल नवमी से एकादशी तक

पद्ममहापुराण — उत्तरखण्ड अध्याय 26: तुलसी त्रिरात्र व्रत: 3 अद्भुत लाभ और चमत्कारी महत्व जय श्री हरी🙏 सनातन धर्म में तुलसी को केवल एक पवित्र वनस्पति ही नहीं, बल्कि स्वयं श्रीहरि की प्रिय और साक्षात् देवीस्वरूपा माना गया है। पद्ममहापुराण में वर्णित तुलसी त्रिरात्र व्रत ऐसा दिव्य व्रत है, जो धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष—चारों

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तुलसी पौधे के साथ विराजमान शालग्राम शिला, पृष्ठभूमि में भगवान विष्णु और शिव – पद्मपुराण के अनुसार तुलसी और शालग्राम का माहात्म्य दर्शाती दिव्य छवि

तुलसी और शालग्राम की महिमा: पद्मपुराण में वर्णित दिव्य रहस्य

पद्ममहापुराण — उत्तरखण्ड अध्याय 25: तुलसी और शालग्राम की महिमा: पद्मपुराण में वर्णित दिव्य रहस्य जय श्री हरी🙏 तुलसी और शालग्राम का स्थान सनातन धर्म में अत्यंत पवित्र और दिव्य माना गया है। तुलसी और शालग्राम केवल पूजन की वस्तुएँ नहीं, बल्कि साक्षात् श्रीहरि के स्वरूप हैं। पद्ममहापुराण के उत्तर खण्ड में भगवान शिव और

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प्रयाग महिमा का दिव्य दृश्य जिसमें भगवान विष्णु और भगवान शिव गंगा-यमुना-सरस्वती के संगम को आशीर्वाद देते हुए, संगम में स्नान करते श्रद्धालु और अक्षयवट का पवित्र वातावरण दर्शाया गया है।

प्रयाग महिमा: त्रिवेणी संगम का दिव्य रहस्य | क्यों है प्रयाग सभी तीर्थों में श्रेष्ठ

पद्ममहापुराण — उत्तरखण्ड अध्याय 24: प्रयाग महिमा: त्रिवेणी संगम का दिव्य रहस्य | 12 दिव्य और रहस्मयी बातें जय श्री हरी🙏 श्रीपद्ममहापुराण – उत्तर खण्ड, उमापति-नारद संवाद सनातन धर्म में तीर्थों का अत्यंत विशेष स्थान बताया गया है। तीर्थ केवल जल, भूमि या पर्वत का संगम नहीं होते, बल्कि वे ईश्वर की सजीव उपस्थिति के

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गया तीर्थ की दिव्य छवि जिसमें भगवान विष्णु, भगवान शिव और श्राद्ध करते श्रद्धालु दिखाई दे रहे हैं, कर्म और पाप से मुक्ति तथा मोक्ष का मार्ग दर्शाती हुई आध्यात्मिक कथा।

गया तीर्थ महिमा: श्राद्ध, दर्शन और मोक्ष का दिव्य रहस्य

पद्ममहापुराण — उत्तरखण्ड अध्याय 23B: गया तीर्थ महिमा: श्राद्ध, दर्शन और मोक्ष का दिव्य रहस्य सनातन परंपरा में तीर्थों का स्थान केवल भौगोलिक नहीं, बल्कि गहन आध्यात्मिक चेतना और दिव्य अनुभूति से जुड़ा हुआ माना गया है। तीर्थ वह पावन स्थल है जहाँ मनुष्य का बाह्य जीवन—अर्थात् कर्म, आचरण और व्यवहार—और आंतरिक जीवन—अर्थात् मन, बुद्धि

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तीर्थराज प्रयाग, मोक्षदायिनी काशी और भगवान शिव-विष्णु की दिव्य उपस्थिति दर्शाती संध्या उपासना की आध्यात्मिक छवि

मोक्षदायिनी काशी का दिव्य रहस्य

पद्ममहापुराण — उत्तरखण्ड अध्याय 23A: मोक्षदायिनी काशी का दिव्य रहस्य भारतीय सनातन परंपरा में तीर्थों का आध्यात्मिक अर्थ भारतीय सनातन परंपरा में तीर्थ केवल यात्रा के साधारण स्थल नहीं होते, बल्कि वे आत्मा के संस्कारों को शुद्ध करने वाले जीवंत साधन माने गए हैं। तीर्थ वह स्थान है जहाँ मनुष्य का बाह्य और आंतरिक जीवन

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श्रीशैल (श्री सैलम) पर्वत और मल्लिकार्जुन ज्योतिर्लिंग का दिव्य दृश्य, जहाँ भगवान शिव ध्यानमग्न मुद्रा में विराजमान हैं, चारों ओर हरियाली, पर्वत, नदी और पवित्र मंदिर दिखाई दे रहे हैं।

श्रीशैल का माहात्म्य वर्णन

पद्ममहापुराण — उत्तरखण्ड अध्याय 20: श्रीशैल का माहात्म्य वर्णन जय श्री हरी | ॐ नमः शिवाय श्रीशैल पर्वत का माहात्म्य (पद्म पुराण) श्रीशैल या श्री सैलम पर्वत का वर्णन पदम् महापुराण के उत्तरखंड में 18 श्लोको में महात्म्य बताया गया है जिसका साधारण शब्दों में यहां जानिए। कहा गया है कि श्रीशैलजी का माहात्म्य सुनने

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पौराणिक नदियां: भारतीय नदियों का दिव्य चित्र जिसमें विभिन्न नदी देवियाँ अपने-अपने वाहन पर विराजमान होकर प्रवाहित जलधारा का प्रतीकात्मक रूप दिखा रही हैं

क्या ये 13 पौराणिक नदियां अस्तित्व में है ?

पद्ममहापुराण — उत्तरखण्ड पौराणिक नदियां: क्या ये 13 पौराणिक नदियां अस्तित्व में है ? हजारों लाखों साल बीत गए, जो था, अब नहीं है। अगर कुछ शेष है तो अपने मूल रूप में नहीं है। दुनिया की सभी प्राचीन सभ्यताएं नदियों के किनारे फली -फूली। इसी बीच धरती पर भोगौलिक परिवर्तन ने नदियों को अपनी

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