श्री राम गीता - Bhagwan Shri Ram singhasan par virajmaan hain aur unke charanon mein haath jode vinamra aur udaasin bhav mein Lakshman ji baithe hain, bhakti aur samarpan ka divya drishya

श्री राम गीता

श्री राम गीता अध्यात्म रामायण जय श्री राम🙏 आपने कभी ऐसा महसूस किया होगा कि आप जिस चीज के लिए सालों से मेहनत कर रहे थे। आपको वह चीज, वह सफलता आपको मिल जाती है। उस सफलता से कुछ पल, कुछ घंटे या कुछ दिन ख़ुशी मिलती है। अंदर से आवाज आती है अब आगे […]

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भगवद्गीता कही गई या प्रकट हुई - कुरुक्षेत्र के युद्धभूमि में रथ पर बैठे श्रीकृष्ण अर्जुन को भगवद्गीता का उपदेश देते हुए, पृष्ठभूमि में खड़ी विशाल सेना और दिव्य वातावरण

भगवद्गीता कही गई या प्रकट हुई

भगवद्गीता कही गई या प्रकट हुई भगवद्गीता का रहस्य जय श्री कृष्णा🙏 “गीता कही नहीं गई थी, वह अर्जुन के भीतर प्रकट हुई थी और जो भीतर प्रकट होता है, वह समय में नहीं, समय के पार घटता है।” कुरुक्षेत्र के युद्ध भूमि में दोनों पक्षों के सभी योद्धा अपनी अपनी जगह पर तैनात हो

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श्री सीताराम धाम परिकर वंदना: अयोध्या नगरी के दिव्य दृश्य में सरयू नदी के किनारे स्वर्ण सिंहासन पर विराजमान भगवान श्रीराम और माता सीता, पीछे भव्य मंदिर और दीपों से सजा आध्यात्मिक वातावरण।

श्री सीताराम धाम परिकर वंदना

श्री सीताराम-धाम-परिकर वंदना रामचरितमानस – बालकाण्ड जय श्री सीताराम🙏 रामचरितमानस – बालकाण्ड में “श्री सीताराम-धाम-परिकर वंदना” एक अत्यंत सुंदर और गूढ़ आध्यात्मिक आरंभ है। इसे समझना मतलब पूरे मानस के भावलोक में प्रवेश करना है। श्री सीताराम-धाम-परिकर वंदना का अर्थ क्या है? श्री सीताराम → भगवान श्रीराम और माता सीता धाम → उनका दिव्य निवास

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वाल्मीकि मुनि रामायण लिखते हुए, चारों वेद, ब्रह्मा, देवता, भगवान शिव और माता पार्वती के साथ रामचरितमानस बालकाण्ड की वंदना दर्शाता अद्भुत चित्र

रामचरितमानस बालकाण्ड की अद्भुत वंदना

रामचरितमानस बालकाण्ड की अद्भुत वंदना रामचरितमानस के रचयिता गोस्वामी तुलसीदास जी बालकाण्ड प्रारम्भ करते ही वंदना पदावली में पंचवंदना करते हैं। इन पंचवंदना पदों में तुलसीदासजी ने श्रीगणेश, सरस्वती, गुरु, भगवान शिव और श्रीराम — इन पाँच दिव्य रूपों की वंदना की है। इस महान ग्रन्थ को पूरा करने के उद्देश्य से तुलसीदास जी केवल

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राम नाम सबसे बड़ा-राम नाम की महिमा दर्शाता हुआ रामचरितमानस बालकाण्ड का thumbnail जिसमें शिवजी, तुलसीदासजी और श्रीराम-हनुमान की दिव्य छवि दिखाई गई है

राम नाम क्यों है सबसे बड़ा? जानिए रामचरितमानस का गूढ़ रहस्य

  📚 Categories पद्मपुराण रामायण और रामचरित मानस श्रीकृष्ण कथा पौराणिक कथा विष्णु सहस्रनाम  

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नारी शक्ति आद्य शक्ति प्रकृति: आदिशक्ति देवी सिंह पर विराजमान हैं, दोनों ओर माता सीता, द्रौपदी, लक्ष्मी और सरस्वती दिव्य स्वरूप में दर्शाई गई हैं।

नारी शक्ति आद्य शक्ति प्रकृति

नारी शक्ति आद्य शक्ति प्रकृति पौराणिक कथाएं जय श्री हरी🙏 समय की गहराइयों से एक स्वर उठता है। एक ऐसा स्वर, जो कभी इतिहास बना, कभी वेदों में गूंजा, और कभी सभ्यताओं के उत्थान और पतन का कारण बना। यह स्वर है नारी शक्ति आद्य शक्ति प्रकृति की अतीत की आवाज। अतीत कहता है —”मैं

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हिन्दू पौराणिक कथा को दर्शाता पारंपरिक डिजिटल चित्र, जिसमें दिव्य वातावरण, देवत्व और आध्यात्मिक भाव स्पष्ट दिखाई देते हैं

सहस्त्रार्जुन बनाम रावण और परशुराम

पद्ममहापुराण — सृष्टिखण्ड, अध्याय 12 चंद्र वंश की उत्पत्ति: सहस्त्रार्जुन बनाम रावण और परशुराम जय श्री हरी🙏 जहाँ अत्यधिक शक्ति और ऐश्वर्य होता है, वहाँ परीक्षा भी अनिवार्य होती है। हैहय वंश के महान चक्रवर्ती सम्राट सहस्त्रार्जुन के जीवन की यह अंतिम कथा वीरता, अहंकार, शाप और दैवी न्याय की महाकाव्यात्मक गाथा है। सहस्त्रार्जुन नर्मदा

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हैहय वंश के चक्रवर्ती सम्राट सहस्त्रार्जुन की दिव्य छवि, सहस्र भुजाओं वाले कार्तवीर्य अर्जुन, दत्तात्रेय की कृपा, यदु–पुरु वंश और श्रीकृष्ण अवतार की पौराणिक पृष्ठभूमि दर्शाती हुई पौराणिक कला

हैहय वंश और सहस्त्रार्जुन की उत्पत्ति

पद्ममहापुराण — सृष्टिखण्ड, अध्याय 12 चंद्र वंश की उत्पत्ति: हैहय वंश और सहस्त्रार्जुन की उत्पत्ति जय श्री हरी🙏 प्राचीन भारत की वंश परंपराओं में हैहय वंश का नाम विशेष सम्मान और वीरता के साथ लिया जाता है। इन श्लोकों में बताया गया है कि चन्द्रवंश की परंपरा से आगे चलकर हैहय वंश का प्रादुर्भाव हुआ।

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चन्द्रवंश की वंशावली दर्शाता पौराणिक चित्र जिसमें आयु, नहुष और राजा ययाति के साथ उनके पुत्र पुरु और यदु दिखाए गए हैं, ऊपर देवताओं की दिव्य आभा तथा नीचे यदुवंश से उत्पन्न भगवान श्रीकृष्ण का संकेत, धर्म और कर्म की परंपरा को दर्शाता हुआ दृश्य।

आयु → नहुष → ययाति वंश विस्तार

पद्ममहापुराण — सृष्टिखण्ड, अध्याय 12 चंद्र वंश की उत्पत्ति: आयु → नहुष → ययाति वंश विस्तार जय श्री हरी🙏 पुराणों में वंशों का वर्णन केवल राजाओं की सूची नहीं है, बल्कि यह धर्म, कर्म और भविष्य की दिशा का संकेत होता है। चन्द्रवंश की परंपरा में आयु, नहुष और ययाति ऐसे महत्त्वपूर्ण नाम हैं, जिनके

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पुरूरवा और उर्वशी की पौराणिक प्रेमकथा का दृश्य, जिसमें चंद्रवंशी राजा पुरूरवा दिव्य अप्सरा उर्वशी को आलिंगन में लिए खड़े हैं, ऊपर ब्रह्मा जी आशीर्वाद मुद्रा में दिखाई देते हैं, आकाश में सूर्य और चन्द्र के प्रतीक हैं तथा पीछे देवसभा और पृथ्वी-स्वर्ग का संयुक्त दृश्य उपस्थित है।

पुरूरवा और उर्वशी की अमर प्रेमकथा

पद्ममहापुराण — सृष्टिखण्ड, अध्याय 12 चंद्र वंश की उत्पत्ति: पुरूरवा और उर्वशी की अमर प्रेमकथा जय श्री हरी🙏 पुराणों में वर्णित कुछ कथाएँ केवल इतिहास नहीं होतीं, वे मानव जीवन के गहरे भावों—प्रेम, विरह, मर्यादा और कर्म—का दर्पण होती हैं। बुध के जन्म और ग्रह के रूप में स्थापित होने के बाद बुध और ईला

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