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🙏 दुर्गा सहस्रनाम स्तोत्रम् (श्लोक 121-136) 🙏
देवी दुर्गा के हजार नामों में अंतिम 16 श्लोक एवं उनके हिन्दी अर्थ
श्लोक 121
प्राकारवलया वेला मर्यादा च महोदधिः।
पोषिणी शोषिणी शक्तिर्दीर्घकेशी सुलोमशा॥121॥
पोषिणी शोषिणी शक्तिर्दीर्घकेशी सुलोमशा॥121॥
हिन्दी अर्थ: वे प्राकार (किले की दीवार), समय की मर्यादा और समुद्र के समान हैं। वे पोषण और शोषण करने वाली शक्ति हैं। उनके लंबे केश और सुंदर अंग हैं।
श्लोक 122
ललिता मांसला तन्वी वेदवेदाङ्गधारिणी।
नरासृक्पानमत्ता च नरमुण्डास्थिभूषणा॥122॥
नरासृक्पानमत्ता च नरमुण्डास्थिभूषणा॥122॥
हिन्दी अर्थ: वे ललिता हैं, तन्वी और वेद-वेदांग की धारिणी हैं। वे नर-रक्तपान में मत्त और नर-मुंडों की माला तथा अस्थियों की भूषा धारण करने वाली हैं।
श्लोक 123
अक्षक्रीडारतिः शारि शारिकाशुकभाषिणी।
शाम्भरी गारुडीविद्या वारुणी वरुणार्चिता॥123॥
शाम्भरी गारुडीविद्या वारुणी वरुणार्चिता॥123॥
हिन्दी अर्थ: वे पासा खेलने में रत, शारिका पक्षी के समान बोलने वाली, शाम्भरी विद्या की अधिष्ठात्री और वारुणी देवी हैं जिन्हें वरुण देवता पूजते हैं।
श्लोक 124
वाराही तुण्डहस्ता च दंष्ट्रोद्धृतवसुन्धरा।
मीनमूर्तिर्धरामूर्तिः वदान्याऽप्रतिमाश्रया॥124॥
मीनमूर्तिर्धरामूर्तिः वदान्याऽप्रतिमाश्रया॥124॥
हिन्दी अर्थ: वे वाराही हैं, जिनके हाथ में सूअर का थूथन है। वे दाँतों से पृथ्वी को धारण करने वाली हैं। वे मीन रूप और धरामूर्ति हैं, वदान्या और अप्रतिम आश्रय हैं।
श्लोक 125
अमूर्ता निधिरूपा च शालिग्रामशिलाशुचिः।
स्मृतिसंस्काररूपा च सुसंस्कारा च संस्कृतिः॥125॥
स्मृतिसंस्काररूपा च सुसंस्कारा च संस्कृतिः॥125॥
हिन्दी अर्थ: वे अमूर्त, निधिरूपा और शालिग्रामशिला समान पवित्र हैं। वे स्मृति और संस्कार की अधिष्ठात्री तथा संस्कृत भाषा की स्वरूपिणी हैं।
श्लोक 126
प्राकृता देशभाषा च गाथा गीतिः प्रहेलिका।
इडा च पिङ्गला पिङ्गा सुषुम्ना सूर्यवाहिनी॥126॥
इडा च पिङ्गला पिङ्गा सुषुम्ना सूर्यवाहिनी॥126॥
हिन्दी अर्थ: वे प्राकृत भाषा, देशभाषा, गाथा, गीति और पहेली हैं। वे इड़ा, पिंगला और सुषुम्ना नाड़ियों की प्रवाहिनी हैं।
श्लोक 127
शशिस्रवा च तालुस्था काकिन्यमृतजीविनी।
अणुरूपा बृहद्रूपा लघुरूपा गुरुस्थिता॥127॥
अणुरूपा बृहद्रूपा लघुरूपा गुरुस्थिता॥127॥
हिन्दी अर्थ: वे चंद्रमा जैसी कानों वाली, तालु में स्थित, काकिनी और अमृतजीविनी हैं। वे सूक्ष्म, विशाल, लघु और गुरु स्वरूपा हैं।
श्लोक 128
स्थावरा जङ्गमाचैव कृतकर्मफलप्रदा।
विषयाक्रान्तदेहा च निर्विशेषा जितेन्द्रिया॥128॥
विषयाक्रान्तदेहा च निर्विशेषा जितेन्द्रिया॥128॥
हिन्दी अर्थ:वे स्थावर-जंगम (चल और अचल) में व्याप्त हैं। वे कर्मफल देने वाली हैं। वे विषयों से आक्रांत होकर भी निर्विशेष और जितेन्द्रिय स्वरूपा हैं।
श्लोक 129
चित्स्वरूपा चिदानन्दा परब्रह्मप्रबोधिनी।
निर्विकारा च निर्वैरा विरतिः सत्यवर्द्धिनी॥129॥
निर्विकारा च निर्वैरा विरतिः सत्यवर्द्धिनी॥129॥
हिन्दी अर्थ: वे चैतन्य स्वरूपा, चिदानंदमयी और परब्रह्म का बोध कराने वाली हैं। वे निर्विकार, निर्वैर और वैराग्य की दात्री हैं, सत्य की वृद्धि करने वाली हैं।
श्लोक 130
पुरुषाज्ञा चा भिन्ना च क्षान्तिः कैवल्यदायिनी।
विविक्तसेविनी प्रज्ञा जनयित्री च बहुश्रुतिः॥130॥
विविक्तसेविनी प्रज्ञा जनयित्री च बहुश्रुतिः॥130॥
हिन्दी अर्थ: वे पुरुष की आज्ञा का पालन करने वाली और कभी-कभी उससे भिन्न भी हैं। वे क्षमा की दात्री, कैवल्य देने वाली हैं। वे एकांत सेवा में प्रसन्न, प्रज्ञा और ज्ञान की जननी हैं।
श्लोक 131
निरीहा च समस्तैका सर्वलोकैकसेविता।
शिवा शिवप्रिया सेव्या सेवाफलविवर्द्धिनी॥131॥
शिवा शिवप्रिया सेव्या सेवाफलविवर्द्धिनी॥131॥
हिन्दी अर्थ: वे इच्छारहित, समस्त में एकरूपा और सभी लोकों द्वारा सेवित हैं। वे शिवा हैं, शिवप्रिया हैं और सेवा का फल बढ़ाने वाली हैं।
श्लोक 132
कलौ कल्किप्रिया काली दुष्टम्लेच्छविनाशिनी।
प्रत्यञ्चा च धुनर्यष्टिः खड्गधारा दुरानतिः॥132॥
प्रत्यञ्चा च धुनर्यष्टिः खड्गधारा दुरानतिः॥132॥
हिन्दी अर्थ: कलियुग में वे कल्कि की प्रिय हैं। वे काली हैं, दुष्टों और म्लेच्छों का नाश करने वाली हैं। वे भीतर की ओर जाने वाली शक्ति, दंडधारिणी और खड्गधारिणी हैं।
श्लोक 133
अश्वप्लुतिश्च वल्गा च सृणिः स्यन्मृत्युवारिणी।
वीरभूर्वीरमाता च वीरसूर्वीरनन्दिनी॥133॥
वीरभूर्वीरमाता च वीरसूर्वीरनन्दिनी॥133॥
हिन्दी अर्थ: वे घोड़े पर कूदने वाली, लगाम और हल की धारिणी हैं। वे अकाल मृत्यु का निवारण करती हैं। वे वीरों की भूमि, वीरों की माता, वीरों की उत्पत्ति और वीरों की आनंददायिनी हैं।
श्लोक 134
जयश्रीर्जयदीक्षा च जयदा जयवर्द्धिनी।
सौभाग्यसुभगाकारा सर्वसौभाग्यवर्द्धिनी॥134॥
सौभाग्यसुभगाकारा सर्वसौभाग्यवर्द्धिनी॥134॥
हिन्दी अर्थ: वे जयश्री हैं, विजय की दीक्षा देने वाली हैं। वे विजय और सौभाग्य प्रदान करती हैं और उसे बढ़ाती हैं। वे सर्व सौभाग्य की वृद्धि करने वाली हैं।
श्लोक 135
क्षेमङ्करी क्षेमरूपा सर्त्कीत्तिः पथिदेवता।
सर्वतीर्थमयीमूर्तिः सर्वदेवमयीप्रभा॥135॥
सर्वतीर्थमयीमूर्तिः सर्वदेवमयीप्रभा॥135॥
हिन्दी अर्थ: वे कल्याण करने वाली, कल्याण स्वरूपा और सत्य कीर्ति हैं। वे पथ की देवी हैं। वे सर्वतीर्थमयी और सर्वदेवमयी प्रभा हैं।
श्लोक 136
सर्वसिद्धिप्रदा शक्तिः सर्वमङ्गलमङ्गला।
पुण्यं सहस्रनामेदं शिवायाः शिवभाषितम॥136॥
पुण्यं सहस्रनामेदं शिवायाः शिवभाषितम॥136॥
हिन्दी अर्थ: वे सर्वसिद्धि प्रदान करने वाली शक्ति और सर्वमंगलमंगला हैं। यह सहस्रनाम स्तोत्र शिवजी द्वारा बोला गया है और इसे पढ़ना अत्यंत पुण्यदायक है।
॥ जय माँ दुर्गा ॥
माँ आद्या शक्ति, माँ भवानी, माँ जगदम्बिका — आप ही सृष्टि की उत्पत्ति, पालन और संहार की अधिष्ठात्री हैं। आपके सहस्रनाम का पाठ करने से साधक को समस्त सुख, सिद्धि और मोक्ष प्राप्त होता है। हे माँ! अपनी अनंत करुणा से हम सबका जीवन मंगलमय करें।
॥ सर्वमङ्गलमाङ्गल्ये शिवे सर्वार्थसाधिके ।
शरण्ये त्र्यम्बके गौरी नारायणी नमोऽस्तु ते ॥
🌺🌺 जय माता दी 🌺🌺
