प्रयाग महिमा का दिव्य दृश्य जिसमें भगवान विष्णु और भगवान शिव गंगा-यमुना-सरस्वती के संगम को आशीर्वाद देते हुए, संगम में स्नान करते श्रद्धालु और अक्षयवट का पवित्र वातावरण दर्शाया गया है।

प्रयाग महिमा: त्रिवेणी संगम का दिव्य रहस्य | क्यों है प्रयाग सभी तीर्थों में श्रेष्ठ

पद्ममहापुराण — उत्तरखण्ड अध्याय 24: प्रयाग महिमा: त्रिवेणी संगम का दिव्य रहस्य | 12 दिव्य और रहस्मयी बातें जय श्री हरी🙏 श्रीपद्ममहापुराण – उत्तर खण्ड, उमापति-नारद संवाद सनातन धर्म में तीर्थों का अत्यंत विशेष स्थान बताया गया है। तीर्थ केवल जल, भूमि या पर्वत का संगम नहीं होते, बल्कि वे ईश्वर की सजीव उपस्थिति के

प्रयाग महिमा: त्रिवेणी संगम का दिव्य रहस्य | क्यों है प्रयाग सभी तीर्थों में श्रेष्ठ Read More »

गया तीर्थ की दिव्य छवि जिसमें भगवान विष्णु, भगवान शिव और श्राद्ध करते श्रद्धालु दिखाई दे रहे हैं, कर्म और पाप से मुक्ति तथा मोक्ष का मार्ग दर्शाती हुई आध्यात्मिक कथा।

गया तीर्थ महिमा: श्राद्ध, दर्शन और मोक्ष का दिव्य रहस्य

पद्ममहापुराण — उत्तरखण्ड अध्याय 23B: गया तीर्थ महिमा: श्राद्ध, दर्शन और मोक्ष का दिव्य रहस्य सनातन परंपरा में तीर्थों का स्थान केवल भौगोलिक नहीं, बल्कि गहन आध्यात्मिक चेतना और दिव्य अनुभूति से जुड़ा हुआ माना गया है। तीर्थ वह पावन स्थल है जहाँ मनुष्य का बाह्य जीवन—अर्थात् कर्म, आचरण और व्यवहार—और आंतरिक जीवन—अर्थात् मन, बुद्धि

गया तीर्थ महिमा: श्राद्ध, दर्शन और मोक्ष का दिव्य रहस्य Read More »

तीर्थराज प्रयाग, मोक्षदायिनी काशी और भगवान शिव-विष्णु की दिव्य उपस्थिति दर्शाती संध्या उपासना की आध्यात्मिक छवि

मोक्षदायिनी काशी का दिव्य रहस्य

पद्ममहापुराण — उत्तरखण्ड अध्याय 23A: मोक्षदायिनी काशी का दिव्य रहस्य भारतीय सनातन परंपरा में तीर्थों का आध्यात्मिक अर्थ भारतीय सनातन परंपरा में तीर्थ केवल यात्रा के साधारण स्थल नहीं होते, बल्कि वे आत्मा के संस्कारों को शुद्ध करने वाले जीवंत साधन माने गए हैं। तीर्थ वह स्थान है जहाँ मनुष्य का बाह्य और आंतरिक जीवन

मोक्षदायिनी काशी का दिव्य रहस्य Read More »

श्रीशैल (श्री सैलम) पर्वत और मल्लिकार्जुन ज्योतिर्लिंग का दिव्य दृश्य, जहाँ भगवान शिव ध्यानमग्न मुद्रा में विराजमान हैं, चारों ओर हरियाली, पर्वत, नदी और पवित्र मंदिर दिखाई दे रहे हैं।

श्रीशैल का माहात्म्य वर्णन

पद्ममहापुराण — उत्तरखण्ड अध्याय 20: श्रीशैल का माहात्म्य वर्णन जय श्री हरी | ॐ नमः शिवाय श्रीशैल पर्वत का माहात्म्य (पद्म पुराण) श्रीशैल या श्री सैलम पर्वत का वर्णन पदम् महापुराण के उत्तरखंड में 18 श्लोको में महात्म्य बताया गया है जिसका साधारण शब्दों में यहां जानिए। कहा गया है कि श्रीशैलजी का माहात्म्य सुनने

श्रीशैल का माहात्म्य वर्णन Read More »

पौराणिक नदियां: भारतीय नदियों का दिव्य चित्र जिसमें विभिन्न नदी देवियाँ अपने-अपने वाहन पर विराजमान होकर प्रवाहित जलधारा का प्रतीकात्मक रूप दिखा रही हैं

क्या ये 13 पौराणिक नदियां अस्तित्व में है ?

पद्ममहापुराण — उत्तरखण्ड पौराणिक नदियां: क्या ये 13 पौराणिक नदियां अस्तित्व में है ? हजारों लाखों साल बीत गए, जो था, अब नहीं है। अगर कुछ शेष है तो अपने मूल रूप में नहीं है। दुनिया की सभी प्राचीन सभ्यताएं नदियों के किनारे फली -फूली। इसी बीच धरती पर भोगौलिक परिवर्तन ने नदियों को अपनी

क्या ये 13 पौराणिक नदियां अस्तित्व में है ? Read More »

मगरमच्छ पर सवार देवी नर्मदा, पूर्व से पश्चिम की ओर बहती नर्मदा नदी का दिव्य प्रतीकात्मक चित्र

नर्मदा नदी-इतिहास, आस्था और चेतना की नदी

नर्मदा नदी पौराणिक नदियां: इतिहास, आस्था और चेतना की नदी रामायण, महाभारत तथा अनेक परवर्ती पुराण–ग्रंथों में नर्मदा नदी का गौरवपूर्ण उल्लेख मिलता है। पौराणिक परंपरा के अनुसार नर्मदा की एक नहर किसी सोमवंशी राजा द्वारा निकाली गई थी, इसी कारण इसे ‘सोमोद्भवा’ कहा गया। गुप्तकालीन ग्रंथ अमरकोश में भी नर्मदा का यही नाम मिलता

नर्मदा नदी-इतिहास, आस्था और चेतना की नदी Read More »

शिव की जटाओं से अवतरित माँ गंगा, आकाश में भगवान विष्णु का आशीर्वाद, गंगा तट पर श्रद्धालुओं का स्नान, दीपदान और पूजा करते भक्त, गंगा महिमा का दिव्य दृश्य

गंगा, यमुना और महानदी की प्रार्थना कैसे करें | गंगा मईया की महिमा

पद्ममहापुराण — उत्तरखण्ड अध्याय 23: गंगा, यमुना और महानदी की प्रार्थना कैसे करें | गंगा मईया की महिमा जय श्री हरी सनातन धर्म में गंगा केवल एक नदी नहीं, बल्कि साक्षात् देवी हैं। पापों का नाश करने वाली, जीवन को पवित्र करने वाली और मोक्ष का मार्ग प्रशस्त करने वाली हैं। पुराणों में कहा गया

गंगा, यमुना और महानदी की प्रार्थना कैसे करें | गंगा मईया की महिमा Read More »

जालंधर का अंत, योगिनियां - योगिनियों द्वारा जालंधर का अभक्षण करते हुए भगवान शिव का रौद्र रूप, अग्नि और महायुद्ध की पौराणिक दृश्यावली

जालन्धर का अंत, योगिनियों का आविर्भाव और शिवजी का वरदान

पद्ममहापुराण — उत्तरखण्ड अध्याय 19C: जालन्धर का अंत, योगिनियों का आविर्भाव और शिवजी का वरदान जय श्री हरी | ॐ नमः शिवाय जालन्धर का शरीर, जो सिर कटने के बाद भी राक्षसी शक्ति से भरा हुआ था, रक्त से सराबोर होकर नृत्य करने लगा। उसके कंठ से बार-बार नए-नए दैत्य निकलने लगे। शिवजी ने उन

जालन्धर का अंत, योगिनियों का आविर्भाव और शिवजी का वरदान Read More »

भगवान शिव और जालन्धर का अंतिम युद्ध - भगवान शिव त्रिशूल धारण किए हुए असुर जालंधर के साथ भयंकर युद्ध करते हुए, चारों ओर अग्नि, बिजली और युद्धभूमि का दृश्य।

भगवान शिव और जालन्धर का अंतिम युद्ध

पद्ममहापुराण — उत्तरखण्ड अध्याय 19B: भगवान शिव और जालन्धर का अंतिम युद्ध | हिंदी कथा जय श्री हरी | ॐ नमः शिवाय युद्ध के दौरान जब जालंधर भगवान शिव को रोकने में असफल रहा, तब उसने तुरंत माया की रचना की—एक देवी पार्वती के रूप में और दूसरी उनकी सखी जया के रूप में। माया-पार्वती

भगवान शिव और जालन्धर का अंतिम युद्ध Read More »