Current image: माँ दुर्गा सिंह पर विराजमान, अनेक आयुध धारण किए हुए, स्वर्ण आभा से प्रकाशित स्वरूप में — दुर्गा सहस्रनाम स्तोत्र के प्रथम 20 श्लोकों का भावपूर्ण चित्रण।

दुर्गा सहस्रनाम स्तोत्रम् | देवी दुर्गा 1000 नाम स्तोत्रम्

🙏 दुर्गा सहस्रनाम स्तोत्रम् (श्लोक 1–20) 🙏

देवी दुर्गा के हजार नामों में से प्रथम 20 श्लोक एवं उनके हिन्दी अर्थ

श्लोक 1

ॐ महाविद्या जगन्माता महालक्ष्मीः शिवप्रिया।
विष्णुमाया शुभा शान्ता सिद्धासिद्धसरस्वती॥1॥
हिन्दी अर्थ: देवी महाविद्या, जगन्माता, महालक्ष्मी और शिवप्रिया हैं। वे विष्णुमाया, शुभा, शान्ता तथा सिद्ध–असिद्ध स्वरूपिणी सरस्वती हैं।

श्लोक 2

क्षमा कान्तिः प्रभा ज्योत्स्ना पार्वती सर्वमङ्गला।
हिङ्गुला चण्डिका दान्ता पद्मा लक्ष्मीर्हरिप्रिया॥2॥
हिन्दी अर्थ: वे क्षमा, कान्ति, प्रभा और चन्द्रमा की ज्योत्स्ना स्वरूपा हैं। वे पार्वती, सर्वमंगला, हिङ्गुला, चण्डिका, दान्ता, पद्मा, लक्ष्मी और हरिप्रिया भी हैं।

श्लोक 3

त्रिपुरा नन्दिनी नन्दा सुनन्दा सुरवन्दिता।
यज्ञविद्या महामाया वेदमाता सुधाधृतिः॥3॥
हिन्दी अर्थ: वे त्रिपुरा, नन्दिनी, नन्दा और सुनन्दा हैं, जिनकी देवता भी वंदना करते हैं। वे यज्ञविद्या, महामाया, वेदमाता और अमृतरूपी धृति हैं।

श्लोक 4

प्रीतिप्रदा प्रसिद्धा च मृडानी विन्ध्यवासिनी।
सिद्धविद्या महाशक्तिः पृथिवी नारदसेविता॥4॥
हिन्दी अर्थ: वे प्रीतिप्रदा, प्रसिद्धा, मृडानी और विन्ध्यवासिनी हैं। वे सिद्धविद्या, महाशक्ति, पृथ्वी और नारद द्वारा सेवित हैं।

श्लोक 5

पुरुहूतप्रिया कान्ता कामिनी पद्मलोचना।
प्रह्लादिनी महामाता दुर्गा दुर्गतिनाशिनी॥5॥
हिन्दी अर्थ: वे इन्द्रप्रिय, कान्ता, कामिनी और कमलनयन हैं। वे प्रह्लादिनी, महामाता, दुर्गा और दुःखों का नाश करनेवाली हैं।

श्लोक 6

ज्वालामुखी सुगोत्रा च ज्योतिः कुमुदवासिनी।
दुर्गमा दुर्लभा विद्या स्वर्गतिः पुरवासिनी॥6॥
हिन्दी अर्थ: वे ज्वालामुखी, सुगोत्रा, प्रकाशस्वरूपा और कुमुदवासिनी हैं। वे दुर्गमा, दुर्लभ विद्या, स्वर्गगति देनेवाली और नगरों में निवास करनेवाली हैं।

श्लोक 7

अपर्णा शाम्बरी माया मदिरामृदुहासिनी।
कुलवागीश्वरी नित्या नित्यक्लिन्ना कृशोदरी॥7॥
हिन्दी अर्थ: वे अपर्णा, शाम्बरी, माया, मदिरामुखी और मधुर हास्यवाली हैं। वे कुलवागीश्वरी, नित्य, नित्यक्लिन्ना और कृशोदरी हैं।

श्लोक 8

कामेश्वरी च नीला च भिरुण्डा वह्रिवासिनी।
लम्बोदरी महाकाली विद्याविद्येश्वरी तथा॥8॥
हिन्दी अर्थ: वे कामेश्वरी, नीलवर्णा, भिरुण्डा और वह्रिवासिनी हैं। वे लम्बोदरी, महाकाली और विद्याविद्येश्वरी हैं।

श्लोक 9

नरेश्वरी च सत्या च सर्वसौभाग्यवर्धिनी।
सङ्कर्षिणी नारसिंही वैष्णवी च महोदरी॥9॥
हिन्दी अर्थ: वे नरेश्वरी, सत्य, सौभाग्यवर्धिनी, संकर्षिणी, नारसिंही, वैष्णवी और महोदरी हैं।

श्लोक 10

कात्यायनी च चम्पा च सर्वसम्पत्तिकारिणी।
नारायणी महानिद्रा योगनिद्रा प्रभावती॥10॥
हिन्दी अर्थ: वे कात्यायनी, चम्पा, सभी प्रकार की सम्पत्ति देनेवाली, नारायणी, महानिद्रा, योगनिद्रा और प्रभावती हैं।

श्लोक 11

प्रज्ञा पारमिताप्राज्ञा तारा मधुमती मधुः।
क्षीरार्णवसुधाहारा कालिका सिंहवाहना॥11॥
हिन्दी अर्थ: माँ दुर्गा परम प्रज्ञा (ज्ञान की सीमा), तारिणी (पार लगाने वाली), मधुरता से पूर्ण, अमृतस्वरूपा हैं। वे क्षीरसागर से अमृत निकालने वाली, कालिका और सिंहवाहिनी हैं।

श्लोक 12

ॐकारा च सुधाकारा चेतना कोपनाकृतिः।
अर्धबिन्दुधराधारा विश्वमाता कलावती॥12॥
हिन्दी अर्थ: माँ स्वयं ओंकार स्वरूप हैं, सुधा (अमृत) स्वरूपिणी हैं। चेतना की अधिष्ठात्री, कभी-कभी कोप करने वाली, आधे बिंदु की धारिणी (नादब्रह्म स्वरूपा), सम्पूर्ण जगत की माता और कलाओं से सुशोभित हैं।

श्लोक 13

पद्मावती सुवस्त्रा च प्रबुद्धा च सरस्वती।
कुण्डासना जगद्वात्री बुद्धमाता जिनेश्वरी॥13॥
हिन्दी अर्थ: माँ पद्मावती, सुन्दर वस्त्रधारिणी, प्रबुद्धा (जाग्रत स्वरूपा), सरस्वती हैं। कुण्डासन में विराजमान, सम्पूर्ण जगत की पोषक, बुद्ध की माता और जिनेश्वरी (जिनकी आराधना जैन भी करते हैं) हैं।

श्लोक 14

जिनमाता जिनेन्द्रा च शारदा हंसवाहना।
राजलक्ष्मीर्वषट्कारा सुधाकारा सुधोत्सुका॥14॥
हिन्दी अर्थ: माँ जिनों की माता, जिनेन्द्र स्वरूपा, शारदा और हंसवाहिनी हैं। वे राजलक्ष्मी हैं, यज्ञ में “वषट्” ध्वनि रूप हैं, अमृत स्वरूपिणी और अमृत की अभिलाषिणी हैं।

श्लोक 15

राजनीतिस्त्रयी वार्ता दण्डनीतिः क्रियावती।
सद्भूतिस्तारिणी श्रद्धा सद्गतिः सत्यपरायणा॥15॥
हिन्दी अर्थ: माँ राजनीति की अधिष्ठात्री, त्रयी (तीनों वेदों की जननी), वार्ता (नीति/ज्ञान) स्वरूपा हैं। वे दण्डनीति की संरक्षिका, क्रियाशील, सद्भूति (सत्य का आधार), तारिणी, श्रद्धा, उत्तम गति देने वाली और सत्य में लीन रहने वाली हैं।

श्लोक 16

सिन्धुर्मन्दाकिनी गङ्गा यमुना च सरस्वती।
गोदावरी विपाशा च कावेरी च शतह्रदा॥16॥
हिन्दी अर्थ: माँ सभी पवित्र नदियों के रूप में हैं — सिन्धु, मन्दाकिनी, गंगा, यमुना, सरस्वती, गोदावरी, विपाशा, कावेरी और शतद्रु।

श्लोक 17

सरयूश्चन्द्रभागा च कौशिकी गण्डकी शुचिः।
नर्मदा कर्मनाशा च चर्मण्वती च वेदिका॥17॥
हिन्दी अर्थ: वे सरयू, चन्द्रभागा, कौशिकी, गण्डकी, नर्मदा, कर्मनाशा और चर्मण्वती (चम्बल) नदियों के रूप में भी विराजमान हैं। वे सबको पवित्र करने वाली वेदिका हैं।

श्लोक 18

वेत्रवती वितस्ता च वरदा नरवाहना।
सती पतिव्रता साध्वी सुचक्षुः कुण्डवासिनी॥18॥
हिन्दी अर्थ: माँ वेत्रवती, वितस्ता, वरदा और नरवाहना स्वरूपा हैं। वे सती, पतिव्रता, साध्वी, सुंदर नेत्रों वाली और कुण्डवासिनी (योगिनियों के बीच रहने वाली) हैं।

श्लोक 19

एकचक्षुः सहस्राक्षी सुश्रोणिर्भगमालिनी।
सेनाश्रोणिः पताका च सुव्यूहा युद्धकांक्षिणी॥19॥
हिन्दी अर्थ: माँ कभी एक नेत्र वाली तो कभी सहस्रनेत्र वाली हैं। वे सुन्दर कटि वाली, भगमालिनी, सेना की अग्रणी, पताका धारण करने वाली, सुव्यवस्थित व्यूह बनाने वाली और युद्ध की इच्छा रखने वाली वीरता की देवी हैं।

श्लोक 20

पताकिनी दयारम्भा विपञ्ची पञ्चमप्रिया।
परा परकलाकान्ता त्रिशक्तिर्मोक्षदायिनी॥20॥
हिन्दी अर्थ: माँ पताकिनी, करुणा का आरम्भ करने वाली, वीणा (विपञ्ची) बजाने वाली, पंचम स्वर को प्रिय करने वाली हैं। वे परा (परम शक्ति), कलाओं की अधीश्वरी, त्रिशक्ति (इच्छा, ज्ञान, क्रिया शक्ति) और मोक्ष देने वाली हैं।

॥ जय माँ दुर्गा ॥

माँ आद्या शक्ति, माँ भवानी, माँ जगदम्बिका — आप ही सृष्टि की उत्पत्ति, पालन और संहार की अधिष्ठात्री हैं। आपके सहस्रनाम का पाठ करने से साधक को समस्त सुख, सिद्धि और मोक्ष प्राप्त होता है। हे माँ! अपनी अनंत करुणा से हम सबका जीवन मंगलमय करें।

॥ सर्वमङ्गलमाङ्गल्ये शिवे सर्वार्थसाधिके ।
शरण्ये त्र्यम्बके गौरी नारायणी नमोऽस्तु ते ॥

🌺🌺 जय माता दी 🌺🌺