पद्म महापुराण उत्तरखण्ड – अध्याय 4, भाग 3

पद्म महापुराण | अध्याय 4 भाग 3 | श्लोक 26–35 पद्म महापुराण उत्तरखण्ड – अध्याय 4, भाग 3 श्लोक 26–35 : अर्थ एवं भावपूर्ण व्याख्या सहित प्रस्तावना: इस खण्ड में जालंधर की दिव्य नगरी की भव्यता, उसके ऐश्वर्य और शक्ति का वर्णन किया गया है। यह वर्णन न केवल काव्यमयी भाषा में है, बल्कि उसमें […]

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जालंधर की दिव्य नगरी की रचना

जालंधर की दिव्य नगरी की रचना | Padma Puran UttarKhand Adhyay 4 Part 2 जालंधर की दिव्य नगरी की रचना Padma Puran UttarKhand Adhyay 4 – Part 2 जिस क्षण समुद्र के पुत्र जालंधर ने त्रिलोक को अपनी शक्ति से हिला दिया, उस क्षण ब्रह्मा भी दंग रह गए। उन्होंने उसे वह अद्वितीय वरदान दिया

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पद्म पुराण उत्तरखंड अध्याय 4 भाग 1 श्लोक, अर्थ व व्याख्या

पद्म पुराण उत्तरखंड अध्याय 4 के श्लोक 1-11 | श्लोक, अर्थ व व्याख्या | भाग 1 नमस्कार! स्वागत है आपका , जहाँ हम आपको प्राचीन भारतीय ग्रंथों की अद्भुत कथाएँ सरल हिंदी में आपके सामने प्रस्तुत कर रहे हैं। आज हम आपके लिए लेकर आए हैं – पद्म पुराण के उत्तरखंड का वह अद्वितीय प्रसंग,

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Padma Purana Uttar Khand Adhyay 3 Part 4

जालंधर का जन्म और ब्रह्मा का वरदान | Padma Purana Uttar Khand Adhyay 3 Part 4 हम आपको ले चल रहे हैं एक अद्भुत पुराणिक यात्रा पर – पद्म पुराण उत्तर खण्ड के तीसरे अध्याय में। पिछले भाग में आपने देखा — शिव के क्रोध से उत्पन्न हुआ एक भयावह रूप… और देवताओं का गर्व,

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जालंधर की अहंकारपूर्ण चुनौती और भगवान शिव का क्रोध Padma Purana Uttar Khand Adhyay 3 Part 3

जालंधर की अहंकारपूर्ण चुनौती और भगवान शिव का क्रोध | Padma Purana Uttar Khand Adhyay 3 Part 3 पिछले भाग में आपने पढ़ा — इन्द्र, अप्सराएं, गंधर्व और समस्त देवगण अपने विमानों में बैठकर कैलाश पर्वत पर पहुंचे। अपूर्व सुगंधों से महकता वह पर्वत, जैसे पृथ्वी पर स्वर्ग उतर आया हो। अब देवताओं ने शिव

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जालंधर की उत्पत्ति Part 2 | स्वर्ग के देवता कैलाश पहुँचे

जालंधर की उत्पत्ति Part 2 | स्वर्ग के देवता कैलाश पहुँचे | Padma Purana Uttar Khanda Adhyay 3 “जिस क्षण ब्रह्मा के तेज से उत्पन्न हुआ एक अद्भुत बालक, और शिव जी ने उसे वरदान दिया महा बलशाली बनने का… वही क्षण था रचने वाला इतिहास की एक अनसुनी कथा। आपने पिछले भाग में देखा

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पद्म महापुराण उत्तरखण्ड – अध्याय-3 Part-1

पद्म पुराण उत्तरखंड – अध्याय 3 | भाग 1 (श्लोक 1-11) पद्म महापुराण उत्तरखण्ड – अध्याय 3 भाग 1: नारद और युधिष्ठिर का संवाद (श्लोक 1–11) 🌸 जब धर्मराज युधिष्ठिर अपने वनवास के कठिन समय में, दुःख की गहराइयों में डूबे थे — तब एक ज्योतिर्मय क्षण आया। नारद मुनि, ज्ञान और श्रद्धा के प्रतीक,

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पद्ममहापुराण उत्तरखण्ड अध्याय -2

पद्ममहापुराण उत्तरखण्ड अध्याय -2

📚 पद्ममहापुराण उत्तरखण्ड अध्याय -2 श्रीपद्ममहापुराण, हिंदू धर्म के अठारह महापुराणों में से एक प्रमुख पुराण है, जिसमें धर्म, भक्ति, और कर्म का सुंदर समन्वय प्रस्तुत किया गया है। इसके उत्तरखण्ड का प्रथम अध्याय अत्यंत पवित्र और रहस्यपूर्ण था, जिसमें श्रीमहेश (भगवान शिव) द्वारा नारद जी को भगवत्स्वरूप, तीर्थों की महिमा, और भगवान जगन्नाथ की

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पद्म महापुराण – षष्ठ उत्तरखण्ड – अध्याय 1 Part-3

पद्म महापुराण – षष्ठ उत्तरखण्ड – अध्याय 1 Part-3

📜 पद्म महापुराण – षष्ठ उत्तरखण्ड – अध्याय 1 Part-3 📜 पद्म महापुराण का उत्तरखण्ड — धर्म, भक्ति और मोक्ष की गहराइयों में उतरने वाला एक अमूल्य ग्रंथ है। पद्म महापुराण – षष्ठ उत्तरखण्ड – अध्याय 1 Part-3 में श्लोक ४१ से ७० तक के इस खंड में हम पहुँचते हैं अध्यात्म के उन ऊंचाइयों

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पद्म महापुराण – षष्ठ उत्तरखण्ड – अध्याय 1 Part-2

पद्म महापुराण – षष्ठ उत्तरखण्ड – अध्याय 1 Part-2

✨पद्म महापुराण – षष्ठ उत्तरखण्ड – अध्याय 1 Part-2 ✨ क्या केवल एक तीर्थ का दर्शन महापापों को मिटा सकता है?क्या एक नाम का उच्चारण हमें जन्मों की ग्रंथियों से मुक्त कर सकता है? पद्म महापुराण का उत्तरखण्ड – विशेष रूप से अध्याय 1 के श्लोक 21 से 40 – हमें इन्हीं दिव्य प्रश्नों का

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