हिन्दू पौराणिक कथा को दर्शाता पारंपरिक डिजिटल चित्र, जिसमें दिव्य वातावरण, देवत्व और आध्यात्मिक भाव स्पष्ट दिखाई देते हैं

सहस्त्रार्जुन बनाम रावण और परशुराम

पद्ममहापुराण — सृष्टिखण्ड, अध्याय 12 चंद्र वंश की उत्पत्ति: सहस्त्रार्जुन बनाम रावण और परशुराम जय श्री हरी🙏 जहाँ अत्यधिक शक्ति और ऐश्वर्य होता है, वहाँ परीक्षा भी अनिवार्य होती है। हैहय वंश के महान चक्रवर्ती सम्राट सहस्त्रार्जुन के जीवन की यह अंतिम कथा वीरता, अहंकार, शाप और दैवी न्याय की महाकाव्यात्मक गाथा है। सहस्त्रार्जुन नर्मदा […]

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हैहय वंश के चक्रवर्ती सम्राट सहस्त्रार्जुन की दिव्य छवि, सहस्र भुजाओं वाले कार्तवीर्य अर्जुन, दत्तात्रेय की कृपा, यदु–पुरु वंश और श्रीकृष्ण अवतार की पौराणिक पृष्ठभूमि दर्शाती हुई पौराणिक कला

हैहय वंश और सहस्त्रार्जुन की उत्पत्ति

पद्ममहापुराण — सृष्टिखण्ड, अध्याय 12 चंद्र वंश की उत्पत्ति: हैहय वंश और सहस्त्रार्जुन की उत्पत्ति जय श्री हरी🙏 प्राचीन भारत की वंश परंपराओं में हैहय वंश का नाम विशेष सम्मान और वीरता के साथ लिया जाता है। इन श्लोकों में बताया गया है कि चन्द्रवंश की परंपरा से आगे चलकर हैहय वंश का प्रादुर्भाव हुआ।

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चन्द्रवंश की वंशावली दर्शाता पौराणिक चित्र जिसमें आयु, नहुष और राजा ययाति के साथ उनके पुत्र पुरु और यदु दिखाए गए हैं, ऊपर देवताओं की दिव्य आभा तथा नीचे यदुवंश से उत्पन्न भगवान श्रीकृष्ण का संकेत, धर्म और कर्म की परंपरा को दर्शाता हुआ दृश्य।

आयु → नहुष → ययाति वंश विस्तार

पद्ममहापुराण — सृष्टिखण्ड, अध्याय 12 चंद्र वंश की उत्पत्ति: आयु → नहुष → ययाति वंश विस्तार जय श्री हरी🙏 पुराणों में वंशों का वर्णन केवल राजाओं की सूची नहीं है, बल्कि यह धर्म, कर्म और भविष्य की दिशा का संकेत होता है। चन्द्रवंश की परंपरा में आयु, नहुष और ययाति ऐसे महत्त्वपूर्ण नाम हैं, जिनके

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पुरूरवा और उर्वशी की पौराणिक प्रेमकथा का दृश्य, जिसमें चंद्रवंशी राजा पुरूरवा दिव्य अप्सरा उर्वशी को आलिंगन में लिए खड़े हैं, ऊपर ब्रह्मा जी आशीर्वाद मुद्रा में दिखाई देते हैं, आकाश में सूर्य और चन्द्र के प्रतीक हैं तथा पीछे देवसभा और पृथ्वी-स्वर्ग का संयुक्त दृश्य उपस्थित है।

पुरूरवा और उर्वशी की अमर प्रेमकथा

पद्ममहापुराण — सृष्टिखण्ड, अध्याय 12 चंद्र वंश की उत्पत्ति: पुरूरवा और उर्वशी की अमर प्रेमकथा जय श्री हरी🙏 पुराणों में वर्णित कुछ कथाएँ केवल इतिहास नहीं होतीं, वे मानव जीवन के गहरे भावों—प्रेम, विरह, मर्यादा और कर्म—का दर्पण होती हैं। बुध के जन्म और ग्रह के रूप में स्थापित होने के बाद बुध और ईला

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बुध अवतरण की पौराणिक कथा का चित्र, जिसमें तारा से जन्मे बुद्धि के देवता बुध सिंहासन पर विराजमान हैं, ऊपर ब्रह्मा जी आशीर्वाद दे रहे हैं, एक ओर चन्द्रमा और दूसरी ओर बृहस्पति दिखाई देते हैं, तथा आकाश में सूर्य-चन्द्र और ग्रहों का दिव्य दृश्य उपस्थित है।

बुध का जन्म

पद्ममहापुराण — सृष्टिखण्ड, अध्याय 12 चंद्र वंश की उत्पत्ति: बुध का जन्म और ग्रहत्व जय श्री हरी🙏 पौराणिक कथाओं में कुछ प्रसंग छोटे होते हुए भी अत्यंत गूढ़ और दर्शनपूर्ण होते हैं। चन्द्रमा–तारा विवाद के पश्चात उत्पन्न यह कथा उसी श्रेणी की है। ब्रह्माजी के द्वारा समझाने पर चन्द्रमा ने युद्ध रोक दिया और देवगुरु

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चंद्र वंश की पौराणिक चन्द्रमा–तारा विवाद कथा का दृश्य जिसमें भगवान शंकर और चन्द्रमा के बीच भीषण महायुद्ध दिखाया गया है, ऊपर ब्रह्मा जी युद्ध रोकते हुए दिखाई देते हैं, आकाश में सूर्य और चन्द्र के प्रतीक हैं तथा देवताओं और असुरों की सेनाएँ त्रिलोकी को कंपित करती हुई दर्शाई गई हैं।

 चन्द्रमा–तारा विवाद

पद्ममहापुराण — सृष्टिखण्ड, अध्याय 12 चंद्र वंश की उत्पत्ति: चन्द्रमा–तारा विवाद : 5 अद्भुत और चौंकाने वाले रहस्य जिन्होंने हिला दी सृष्टि जय श्री हरी🙏 चन्द्रमा–तारा विवाद – जिसके कारन देवासुर संग्राम हुआ। अवैध प्रेम से उत्पन्न ब्रह्माण्ड की प्रलयकारी अद्भुत घटना। इस घटना ने एक ग्रह को जन्म दिया जिसे बुध ग्रह कहा गया

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सोम (चन्द्रमा) की उत्पत्ति और महिमा- अत्रि मुनि के तप से चन्द्रदेव (सोम) की उत्पत्ति, ब्रह्मा द्वारा अभिषेक और देवताओं के साथ राजसूय यज्ञ का दिव्य दृश्य।

सोम (चन्द्रमा) की उत्पत्ति और महिमा

पद्ममहापुराण — सृष्टिखण्ड, अध्याय 12 चन्द्रमा की उत्पत्ति और महिमा जय श्री हरी🙏 यह घटना महाभारत के पहले की है क्योंकि महाभारत की पृष्ठभूमि हजारों वर्ष पहले तय हो चूका था। कुरु वंश के पहले पुरु वंश और पुरु वंश के पहले चंद्र वंश। तो पहले हम चंद्र वंश से शुरू करते हैं। सनातन धर्म

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कार्तिक मास में तुलसी त्रिरात्र व्रत करते हुए ब्राह्मण द्वारा वैष्णव होम, तुलसी पौधा, कलश, दीप और लक्ष्मी–नारायण भगवान की दिव्य छवि

तुलसी त्रिरात्र व्रत – कार्तिक शुक्ल नवमी से एकादशी तक

पद्ममहापुराण — उत्तरखण्ड अध्याय 26: तुलसी त्रिरात्र व्रत: 3 अद्भुत लाभ और चमत्कारी महत्व जय श्री हरी🙏 सनातन धर्म में तुलसी को केवल एक पवित्र वनस्पति ही नहीं, बल्कि स्वयं श्रीहरि की प्रिय और साक्षात् देवीस्वरूपा माना गया है। पद्ममहापुराण में वर्णित तुलसी त्रिरात्र व्रत ऐसा दिव्य व्रत है, जो धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष—चारों

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तुलसी पौधे के साथ विराजमान शालग्राम शिला, पृष्ठभूमि में भगवान विष्णु और शिव – पद्मपुराण के अनुसार तुलसी और शालग्राम का माहात्म्य दर्शाती दिव्य छवि

तुलसी और शालग्राम की महिमा: पद्मपुराण में वर्णित दिव्य रहस्य

पद्ममहापुराण — उत्तरखण्ड अध्याय 25: तुलसी और शालग्राम की महिमा: पद्मपुराण में वर्णित दिव्य रहस्य जय श्री हरी🙏 तुलसी और शालग्राम का स्थान सनातन धर्म में अत्यंत पवित्र और दिव्य माना गया है। तुलसी और शालग्राम केवल पूजन की वस्तुएँ नहीं, बल्कि साक्षात् श्रीहरि के स्वरूप हैं। पद्ममहापुराण के उत्तर खण्ड में भगवान शिव और

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प्रयाग महिमा का दिव्य दृश्य जिसमें भगवान विष्णु और भगवान शिव गंगा-यमुना-सरस्वती के संगम को आशीर्वाद देते हुए, संगम में स्नान करते श्रद्धालु और अक्षयवट का पवित्र वातावरण दर्शाया गया है।

प्रयाग महिमा: त्रिवेणी संगम का दिव्य रहस्य | क्यों है प्रयाग सभी तीर्थों में श्रेष्ठ

पद्ममहापुराण — उत्तरखण्ड अध्याय 24: प्रयाग महिमा: त्रिवेणी संगम का दिव्य रहस्य | 12 दिव्य और रहस्मयी बातें जय श्री हरी🙏 श्रीपद्ममहापुराण – उत्तर खण्ड, उमापति-नारद संवाद सनातन धर्म में तीर्थों का अत्यंत विशेष स्थान बताया गया है। तीर्थ केवल जल, भूमि या पर्वत का संगम नहीं होते, बल्कि वे ईश्वर की सजीव उपस्थिति के

प्रयाग महिमा: त्रिवेणी संगम का दिव्य रहस्य | क्यों है प्रयाग सभी तीर्थों में श्रेष्ठ Read More »