Current image: प्रयाग महिमा का दिव्य दृश्य जिसमें भगवान विष्णु और भगवान शिव गंगा-यमुना-सरस्वती के संगम को आशीर्वाद देते हुए, संगम में स्नान करते श्रद्धालु और अक्षयवट का पवित्र वातावरण दर्शाया गया है।

 

पद्ममहापुराण — उत्तरखण्ड

अध्याय 24: प्रयाग महिमा: त्रिवेणी संगम का दिव्य रहस्य | 12 दिव्य और रहस्मयी बातें


जय श्री हरी🙏

श्रीपद्ममहापुराण – उत्तर खण्ड, उमापति-नारद संवाद

सनातन धर्म में तीर्थों का अत्यंत विशेष स्थान बताया गया है। तीर्थ केवल जल, भूमि या पर्वत का संगम नहीं होते, बल्कि वे ईश्वर की सजीव उपस्थिति के केंद्र होते हैं। ऐसे पावन तीर्थ मनुष्य के जीवन को शुद्ध करने, उसके पापों को नष्ट करने और उसे मोक्ष मार्ग की ओर प्रेरित करने का कार्य करते हैं। इन्हीं समस्त तीर्थों में श्रेष्ठ, अद्वितीय और परम पावन तीर्थ के रूप में प्रयाग महिमा  का वर्णन शास्त्रों में किया गया है।

आइये हम आपको इस लेख में प्रयाग महिमा की 12 दिव्य और रहस्मयी बातें बताने जा रहें है जिसे जानकर आप चौंक जायेंगे।

1. त्रिवेणी संगम और प्रयाग महिमा

जहाँ एक ओर माँ गंगा की निर्मल और श्वेत धारा बहती है, दूसरी ओर यमुना की श्यामल लहरें प्रवाहित होती हैं और तीसरी ओर अदृश्य रूप में सरस्वती का दिव्य प्रवाह विद्यमान रहता है—वहीं पवित्र प्रयाग तीर्थ स्थित है। इस त्रिवेणी संगम की महिमा इतनी महान है कि स्वयं भगवान शिव ने इसका वर्णन देवर्षि नारद को किया है। इस कथा में वही दिव्य महिमा वर्णित है, जिसे सुनने, पढ़ने और समझने मात्र से मनुष्य के पाप नष्ट हो जाते हैं और उसका जीवन मोक्ष की दिशा में अग्रसर होने लगता है।

2. भगवान शिव द्वारा प्रयाग महिमा का वर्णन

भगवान महादेव कहते हैं— “जैसा मैंने स्वयं सुना है, उसी के अनुसार मैं प्रयाग महिमा का वर्णन कर रहा हूँ।” प्रयाग में किया गया प्रत्येक कर्म अत्यंत पुण्य प्रदान करने वाला होता है। जहाँ गंगा, यमुना और सरस्वती—तीनों पवित्र नदियाँ एक साथ मिलती हैं, वही स्थान प्रयाग कहलाता है। यह तीर्थ इतना श्रेष्ठ है कि देवताओं के लिए भी दुर्लभ माना गया है। तीनों लोकों में प्रयाग जैसा दूसरा कोई तीर्थ न तो पहले हुआ है और न आगे कभी होगा।

3. तीर्थों में श्रेष्ठ प्रयाग और प्रातः स्नान–दान का पुण्य

जैसे समस्त ग्रहों में सूर्य श्रेष्ठ है और सभी नक्षत्रों में चंद्रमा की प्रधानता मानी गई है, वैसे ही समस्त तीर्थों में प्रयाग सर्वोत्तम तीर्थ माना गया है। विद्वानों और श्रद्धालुओं को चाहिए कि वे प्रातःकाल प्रयाग में स्नान करें। जो व्यक्ति जीवन में कभी निर्धन न होने की इच्छा रखता है, उसे प्रातःकाल स्नान करके दान अवश्य करना चाहिए। ऐसा करने वाला व्यक्ति बड़े-से-बड़े पापों से मुक्त होकर परम पद को प्राप्त करता है।

4. प्रयाग महिमा: प्रयाग स्नान, अक्षयवट और विष्णु निवास की महिमा

जो मनुष्य प्रयाग में स्नान करता है, वह धनवान, दीर्घायु और सद्गुणों से युक्त होता है—इसमें कोई संदेह नहीं है। प्रयाग में स्थित अक्षयवट के दर्शन मात्र से भी ब्रह्महत्या जैसा महापाप नष्ट हो जाता है। यह अक्षयवट कल्प के अंत में भी नष्ट नहीं होता। इसी वृक्ष के पत्ते पर भगवान विष्णु शयन करते हैं, इसलिए इसे ‘अक्षय’ कहा गया है।

5. प्रयाग महिमा: प्रयाग में देह त्याग और वैकुंठ प्राप्ति का फल

प्रयाग में भगवान विष्णु का नित्य निवास माना गया है। जो श्रद्धा और भक्ति से वहाँ भगवान नारायण की पूजा करता है, वह महान पापों से मुक्त हो जाता है। उस पवित्र भूमि पर देवता, ऋषि और मनुष्य—सभी अपने-अपने स्वरूप में निवास करते हैं। यहाँ तक कि यदि कोई अत्यंत पापी, चांडाल, दुष्ट या मूर्ख व्यक्ति भी प्रयाग में देह त्याग देता है, तो वह चतुर्भुज रूप धारण कर दीर्घकाल तक वैकुंठ में निवास करता है।

6. प्रयाग महिमा: माघ स्नान और संगम जल का अलौकिक पुण्य

जो व्यक्ति प्रयाग में माघ मास के दौरान स्नान करता है, उसे जो पुण्य फल प्राप्त होता है, उसकी गणना संभव नहीं है। प्रयाग का जल स्वयं भगवान नारायण का स्वरूप माना गया है, जो भोग और मोक्ष—दोनों प्रदान करता है। जैसे ग्रहों में सूर्य और नक्षत्रों में चंद्रमा श्रेष्ठ हैं, वैसे ही सभी महीनों में माघ मास सर्वोत्तम कहा गया है।

7. प्रयाग महिमा: मकर संक्रांति का दुर्लभ योग और संगम स्नान का महत्व

जब माघ मास में सूर्य मकर राशि में प्रवेश करता है, उस समय प्रातःकाल किया गया संगम स्नान अत्यंत पुण्यदायक होता है। उस शुभ समय में गौ के खुर में भरा हुआ थोड़ा-सा जल भी पापियों को स्वर्ग प्रदान करने वाला बन जाता है। संपूर्ण संसार में ऐसा दुर्लभ योग अत्यंत कठिनता से प्राप्त होता है।

8. प्रयाग महिमा: माघ में तीन, पाँच या सात दिन स्नान का वंशवृद्धि फल

यदि कोई व्यक्ति इस पावन योग में तीन, पाँच या सात दिन भी प्रयाग में स्नान कर लेता है, तो वह अपने वंश की उसी प्रकार उन्नति करता है जैसे शुक्ल पक्ष में चंद्रमा प्रतिदिन बढ़ता जाता है। मनुष्य सहित समस्त चराचर प्राणी प्रयाग तीर्थ का आश्रय लेकर शीघ्र ही वैकुंठ को प्राप्त होते हैं।

9. प्रयाग महिमा: ऋषि–देवताओं का प्रयाग निवास और दान–व्रत की प्रशंसा

वसिष्ठ, सनकादि जैसे महान ऋषि बार-बार प्रयाग तीर्थ का सेवन करते हैं। भगवान विष्णु, रुद्र और इंद्र जैसे देवता भी इस श्रेष्ठ तीर्थ प्रयाग में निवास करते हैं। महापुरुष प्रयाग में किए गए दान, व्रत और नियमों की विशेष प्रशंसा करते आए हैं।

10. प्रयाग महिमा: प्रयाग स्नान से पुनर्जन्म से मुक्ति का संदेश

प्रयाग में स्नान करने और वहाँ का जल पान करने से मनुष्य को पुनर्जन्म नहीं लेना पड़ता। इस प्रकार भगवान महादेव के मुख से कही गई प्रयाग तीर्थ की यह महिमा हमें यह शिक्षा देती है कि सच्ची श्रद्धा, स्नान, दान और संयम से युक्त आचरण मनुष्य को सांसारिक बंधनों से मुक्त कर सकता है।

11. प्रयाग महिमा: भोग और मोक्ष का दिव्य द्वार

प्रयाग केवल एक भौगोलिक स्थान नहीं, बल्कि भोग और मोक्ष—दोनों का द्वार है। माघ मास में किया गया संगम स्नान, अक्षयवट का दर्शन और भगवान नारायण का स्मरण—मनुष्य को जन्म-जन्मांतर के बंधनों से मुक्त कर देता है। देवता, ऋषि, महापुरुष और सामान्य जन—सभी के लिए प्रयाग समान रूप से कल्याणकारी है।

12. प्रयाग महिमा: श्रद्धा सहित प्रयाग आश्रय और जीवन की पवित्रता

जो व्यक्ति एक बार भी श्रद्धा और विश्वास के साथ प्रयाग तीर्थ का आश्रय लेता है, उसका जीवन पवित्र हो जाता है और अंततः वह वैकुंठ की ओर अग्रसर होता है। अतः हमें भी चाहिए कि हम इस दिव्य तीर्थ की महिमा को समझें, उसका सम्मान करें और अपने जीवन को धर्म, पुण्य और भक्ति से आलोकित करें।

इस प्रकार श्रीपद्ममहापुराण के छठे उत्तर खण्ड में उमापति-नारद संवादान्तर्गत ‘प्रयाग माहात्म्य वर्णन’ नामक चौबीसवें अध्याय का हिन्दी अनुवाद सम्पूर्ण हुआ। ॥२४॥

Source: पद्मपुराण

ॐ नमः शिवाय🙏 हर हर महादेव 🙏जय गंगा मैया 🌊जय प्रयागराज 🔱